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अशोक की मृत्यु 237 ईसा पूर्व में हुई थी। इनकी मृत्यु के बाद से ही मौर्य साम्राज्य का पतन शुरू हो गया। आगे पढ़े अशोक की मृत्यु व जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें –

इतिहास में मौर्य साम्राज्य को चरम पर ले जाने में सबसे बड़ा योगदान अशोक का ही था। अशोक ने ही मौर्य साम्राज्य को दुनियाभर में मशहूर बनाया। इतिहास उठाकर अगर देखा जाए तो भारत के सबसे बड़े भू भाग पर या कह लीजिए कि अखंड भारत की पहली तस्वीर मौर्य काल में ही नज़र आती है।

प्राचीन इतिहास के सबसे संपन्न कालों में से एक था मौर्य काल। मौर्य साम्राज्य की नींव चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा रखी गई थी और उसके बाद इस साम्राज्य को एकदम ऊंचाई पर लेकर जाने का काम महान अशोक के द्वारा किया गया था।

अशोक की अगर बात करें तो सम्राट अशोक बिंदुसार के पुत्र थे। जब मौर्य साम्राज्य में बिंदुसार का शासन काल हुआ करता था, तब अशोक को उज्जैन तथा तक्षशिला का गवर्नर नियुक्त किया गया था। फिर जब अशोक के पिता बिंदुसार की मृत्यु हुई, उसके बाद अशोक तथा उनके भाइयों में राज सिंहासन को लेकर युद्ध छिड़ गया और सबके सामने ये प्रश्न था कि सिंहासन का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा। भाई- भाई के बीच सिंहासन को लेकर युद्ध छिड़ गया था।

इस युद्ध में अशोक ने बाकी भाइयों को पराजित करके सिंहासन को हासिल किया और 268 ईसा पूर्व में अशोक ने मौर्य साम्राज्य की कमान को अपने हाथों में लिया था। लेकिन ऐसा बताया जाता है कि अशोक के वास्तविक राज्याभिषेक तथा अशोक के सिंहासन पर बैठने के बीच चार साल का अंतराल भी था।

अशोक का राज्याभिषेक 269 ईसा पूर्व में हुआ था और वहीं अशोक ने सिंहासन 273 ईसा पूर्व में हासिल किया था और सिंहासन पर बैठा था। अशोक के शासन काल में मौर्य साम्राज्य खूब फला फूला और दुनियाभर में मौर्य साम्राज्य का नाम मशहूर हो गया। आखिर जब मौर्य साम्राज्य इतना बड़ा और ताकतवर हो ही गया था, तो इसका पतन क्यों हो गया?

ये सवाल सभी के मन में आता है। मौर्य साम्राज्य का पतन तब शुरू हुआ, जब अशोक की मृत्यु हो गई थी। अशोक की मृत्यु होने के बाद कोई ऐसा उत्तराधिकारी मौर्य साम्राज्य को न मिला, जो इस साम्राज्य की शक्तियों को उजागर कर पाता। इसके बाद अब ये प्रश्न आता है कि अशोक की मृत्यु कैसे हुई थी? अशोक की मृत्यु कब और कैसे हुई थी, इसके बारे में हम आगे चर्चा करेंगे।

कैसे बना अशोक शांति और अहिंसा का प्रतीक?

अशोक की मृत्यु

जब तक अशोक बौद्ध धर्म में परिवर्तित नहीं हुआ था, तब तक उसे चंडाशोक के नाम से जाना जाता था, चंडाशोक मतलब क्रूर। उस समय अशोक ने अशोक नर्क नामक एक स्थान को स्थपित किया था। अशोक नर्क में वो अपराधियों को सजा देने का काम किया करता था। फिर जब अशोक ने उज्जैन यात्रा की तो, उस दौरान अशोक को एक व्यापारी की बेटी, ‘विदिशा’ से प्रेम हो गया था।

विदिशा बौद्ध धर्म से ताल्लुक रखती थी। विदिशा से प्रेम होने के बाद अशोक ने पहली बार हिंसा छोड़ अहिंसा को अपनाया था। उज्जैन में जो भी विद्रोह उस समय हो रहे थे, उन सबको अशोक ने अहिंसा से हल किया था। इसके साथ ही उन्होंने विदिशा का हाथ भी मांगा था, लेकिन अशोक को विदिशा सौंपने से वहां के राजा ने इंकार कर दिया था। इसके बाद अशोक पर एक हमला हुआ, और हमले में अशोक को काफी चोट आई। ऐसे मुश्किल समय में विदिशा ने अशोक का काफी ख्याल रखा था। उसके बाद दोनों का प्रेमालाप हुआ और फिर सांची में दोनों एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंध गए थे।

कलिंग युद्ध और अशोक की मृत्यु

विदिशा से शादी करने के बाद जब अशोक वापस पाटलिपुत्र लौटा तो विदिशा को किसी ने भी नहीं स्वीकारा। विदिशा अलग धर्म की थी और एक व्यापारी की बेटी थी, इसीलिए किसी ने उसको अपनाया नहीं। इसीलिए अशोक तुरंत गवर्नर के रूप में वापस उज्जैन आ गए थे। इसके बाद विदिशा ने दो बच्चों को जन्म दिया था।

इधर अशोक के पिता बिंदुसार की भी मृत्यु हो गई थी। बिंदुसार की मृत्यु होने के बाद अशोक ने फिर से हिंसा के रास्ते को अपना लिया था। फिर कलिंग युद्ध भी छिड़ गया था। कलिंग युद्ध में जाने से विदिशा ने अशोक को कई बार रोका था, लेकिन अशोक ने उसकी बात न सुनी।

कलिंग युद्ध में अशोक ने खूब खून- खराबा किया था। वहां उसने एक राजकुमारी के साथ जबरदस्ती शादी भी की थी। इस बात की ख़बर विदिशा को जब लगी तो वो तुरंत उज्जैन वापस चली गई। विदिशा के जाने के बारे में जानकर अशोक काफी दुखी हो गए थे। फिर उन्होंने हमेशा के लिए हिंसा को त्याग दिया था और बौद्ध धर्म के मार्ग पर चल पड़े थे।

उन्होंने अपनी पत्नी विदिशा से वापस पाटलिपुत्र आने के लिए भी आग्रह किया था। लेकिन वो राज़ी ही नहीं हुई। फिर अशोक ने अपने बच्चों को भी विदिशा के पास भेज दिया। कुछ दिन बाद अशोक के बेटे ने उनसे कहा कि वो बौद्ध धर्म का प्रचार करना चाहता था। अशोक ऐसा नहीं चाहते थे लेकिन बेटे के कहने पर उन्होंने इसकी अनुमति उसे दे दी थी। फिर उनकी बेटी ने श्रीलंका जाने के लिए आग्रह किया और वहां पर बौद्ध धर्म का प्रचार करने की इच्छा ज़ाहिर की। इसके बाद अशोक परिवार से पूरी तरह से दूर हो गए थे। कुछ दिन बाद ये ख़बर मिली कि विदिशा की मौत हो गई है। विदिशा की मौत की ख़बर सुनते ही अशोक के पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी। विदिशा की जुदाई अशोक ज्यादा दिन सह न पाए थे। विदिशा के जाने के कुछ समय बाद ही अशोक की भी मृत्यु हो गई।

अशोक की मृत्यु कैसे हुई थी?

अशोक की मृत्यु 2

अशोक की मृत्यु 237 ईसा पूर्व में हुई थी। उन्होंने कुल 37 वर्षों तक शासन किया था। उनकी मौत एक स्वाभाविक मौत थी, वो कलिंग युद्ध के बाद गंभीर रूप से बीमार हो गए थे और लंबी बीमारी की वजह से एक दिन अचानक उनका निधन हो गया था। अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य पूर्वी और पश्चिमी भाग में विभाजित हो गया था। जिसमें पश्चिमी भाग पर संप्रति का शासन था और पूर्वी भाग पर अशोक के पोते दशरथ का शासन था। बाद में पूरे मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया।

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