Press "Enter" to skip to content

कितने प्रकार के होते हैं श्राद्ध ?

मत्स्य पुराण में श्राद्ध के तीन प्रकार, तो यमस्मृति में श्राद्ध के पांच प्रकार बताए गए हैं। श्राद्ध के प्रकार कौन कौन से हैं ? अलग-अलग प्रकार के श्राद्ध करने की विधि और महत्व क्या है ?

आगे इस पोस्ट के जरिए पढ़े विस्तार में –

हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के बाद भी उसकी आत्मा पृथ्वी पर ही भटकती रहती है। मृत्यु के 10 दिन बाद घर की शुद्ध एवं फिर 13वें दिन 13वीं के संस्कार में विधि विधान से ब्राह्मणों को भोज कराने के पश्चात, आत्मा मृत्यु लोक से यमलोक के तरफ सफर पर निकलती है।

हिंदू धर्म के पवित्र पुराण, गरुड़ पुराण एवं मत्स्य पुराण के मुताबिक आत्मा को पृथ्वी लोक से यमलोक तक का सफर तय करने में 11 महीने का समय लगता है। इस 11 महीनें के सफर में आत्मा को भोजन और जल मिलता रहे, इसके लिए ही पृथ्वी लोक पर उसके परिजनों द्वारा श्राद्ध, पिंडदान एवं तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि श्राद्ध, पिंडदान एवं तर्पण की क्रिया विधि विधान से नहीं की जाती है तो आत्मा भूख-प्यास से व्याकुल रहती है, और उसे तृप्ति नहीं मिल पाती है। इस परिस्थिति में आत्मा पृथ्वीलोक से यमलोक तक के सफर को तय नहीं कर पाती और दरबदर भटकती रहती है।

मृत आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धा एवं भाव के साथ किए गए पिंडदान एवं तर्पण को श्राद्ध कहते हैं। मृत आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध करना अति आवश्यक है। श्राद्ध से जुड़े कई नियम हैं। जैसे मृत्यु के पश्चात प्रथम श्राद्ध कब करना चाहिए ? प्रथम वार्षिक श्राद्ध कब करना चाहिए ? पितृपक्ष का श्राद्ध कब करना चाहिए ? और सबसे महत्वपूर्ण बात श्राद्ध किस प्रकार करना चाहिए ?

श्राद्ध के प्रकार

श्राद्ध के प्रकार 2

श्राद्ध के भी कई प्रकार होते हैं। हिंदुओं के पवित्र पुराण मत्स्य पुराण के अनुसार मुख्य रूप से श्राद्ध तीन प्रकार के होते हैं । जो हैं –

  • नित्य श्राद्ध
  • नैमित्तिक श्राद्ध
  • काम्य श्राद्ध

इसके अलावा यमस्मृति में श्राद्ध के मुख्य पांच प्रकार का वर्णन किया गया है। जो कुछ इस प्रकार हैं –

  • नित्य श्राद्ध
  • नैमित्तिक श्राद्ध
  • काम्य श्राद्ध
  • वृद्धि श्राद्ध
  • पावर्ण श्राद्ध
श्राद्ध के प्रकार

वैदिक मान्यता के अनुसार पुराणों में श्राद्ध के 12 प्रकारों का वर्णन किया गया है। इनमे नित्य श्राद्ध, नैमित्तिक श्राद्ध, काम्य श्राद्ध, वृद्धि श्राद्ध, पावर्ण श्राद्ध के अलावा सपिंडन श्राद्ध, गोष्ठी श्राद्ध, शुद्धयर्थ श्राद्ध, कर्माग श्राद्ध, यात्रार्थ श्राद्ध, पुष्ट्यर्थ श्राद्ध, एवं दैविक श्राद्ध शामिल हैं।

क्या होता है नित्य श्राद्ध ?

प्रतिदिन श्रद्धा एवं भाव के साथ पितरों एवं पूर्वजों को जल एवं अन्य अर्पित करना नित्य श्राद्ध की श्रेणी में आता है। इस श्राद्ध के लिए विश्वेदेव को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती है। मात्र जल अर्पित करने से भी ये श्राद्ध संपन्न हो जाता है।

नैमित्तिक श्राद्ध क्या है ?

नैमित्तिक श्राद्ध को एकोद्विष्ट के नाम से भी संबोधित किया जाता है। इस श्राद्ध में किसी एक को निमित्त मानते हुए श्राद्ध की क्रिया की जाती है। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर दशाह, एकादशाह को नैमित्तिक श्राद्ध की श्रेणी में रखा जाता है। इस श्राद्ध में भी विश्वेदेव को स्थापित करने का प्रावधान नहीं है।

क्या है काम्य श्राद्ध ?

जब मन में किसी कामना को रखकर श्राद्ध करने का प्रण लिया जाता है, और उस कामना की पूर्ति हेतु श्राद्ध क्रिया की जाती है, तो इस प्रकार के श्राद्ध को काम्य श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। इसमें पुत्र प्राप्ति की कामना, मोक्ष प्राप्ति की कामना या कोई अन्य कामना शामिल है।

वृद्धि श्राद्ध में क्या होता है ?

किसी भी मांगलिक कार्य अथवा शुभ मौके पर पूर्वजों एवं पितरों को प्रसन्न करने हेतु एवं उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से जो श्राद्ध किया जाता है, उसे वृद्धि श्राद्ध का नाम दिया गया है। उदाहरण के लिए परिवार में किसी पुत्र का जन्म होता है, नए घर का गृह प्रवेश होता है या फिर किसी का शादी विवाह होता है, तो इस खास मौके पर पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है।

श्राद्ध के प्रकार 3

पार्वण श्राद्ध किसे कहते हैं ?

पार्वण श्राद्ध यानी किसी पर्व विशेष पर किया जाने वाला श्राद्ध। पितृ पक्ष का श्राद्ध, अमावस्या का श्राद्ध या व्यक्ति की मृत्यु की तिथि पर किया जाने वाला श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध के नाम से जाना जाता है। पार्वण श्राद्ध को विश्वेदेव को स्थापित कर के किया जाता है।

सपिंडन श्राद्ध में क्या होता है ?

सपिंडन शब्द का अर्थ होता है, पिण्डो को मिलाना। शाब्दिक अर्थ के अनुसार ही इस श्राद्ध में पितृ पिंड एवं प्रेत पिंडों का मेल कराया जाता है।

गोष्ठी श्राद्ध क्या है ?

समूह में किए जाने वाले श्राद्ध को गोष्ठी श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। इस श्राद्ध में कई पितरों एवं पूर्वजों की आxत्मा की तृप्ति के लिए एक साथ सामूहिक रूप से श्राद्ध किया जाता है।

शुद्धयर्थ श्राद्ध में क्या किया जाता है ?

घर की शुद्धि के लिए जो श्राद्ध किया जाता है उसे शुद्धयर्थ श्राद्ध के नाम से जाना जाता है। इस श्राद्ध में शुद्धि के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराने का प्रावधान है।

श्राद्ध के प्रकार 4

क्या होता है कर्मांग श्राद्ध का अर्थ ?

कर्मांग यानी कर्म का अंग। नाम के अनुरूप हो इस श्राद्ध को प्रधान कर्म के अंग के रूप में संपन्न किया जाता है।

यात्रार्थ श्राद्ध क्या है ?

किसी विशेष यात्रा के उद्देश्य से किए जाने वाले श्राद्ध को यात्रार्थ श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। ये श्राद्ध मुख्य रूप से किसी तीर्थ यात्रा पर जाने के उद्देश्य से किया जाता है। इस श्राद्ध को घृत श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।

पुष्ट्यर्थ श्राद्ध किसलिए किया जाता है ?

जब शारीरिक अथवा आर्थिक उन्नति के उद्देश्य से कोई श्राद्ध किया जाता है तो उसे पुष्ट्यर्थ श्राद्ध के रूप में जाना जाता है।

दैविक श्राद्ध क्या है ?

ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले श्रद्धा को दैविक श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। मुख्य रूप से ये श्राद्ध अपने परिवार की सुख, समृद्धि व धन-धान्य के लिए किया जाता है ।

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *